जीवित हूँ मैं

जीवित हूँ मै अभी
आत्मा नही बनना मुझे
जीना हैं ,,सशरीर यहाँ
लड़ना हैं तमाम रिवाजो से
जो बने हैं सिर्फ मेरे लिए
जो बन्धन मेरे मरने पर टूटे
उन्हें तोड़ न सकी तो
इतना तो कमजोर
कर ही दूँगी
अगर दोबारा
उस रस्सी को
काम में लेने
लायक रह ही
न जाये फिर उन
समाज के ठेकेदारो के
हाथ में सिर्फ
होगी मुक्ति
व्यर्थ के रिवाजो
खोखले आदर्शो
और आधी दुनिया
को हराने के प्रयासों की

◆पूनम◆

         

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