जुनून

बन्द आँखों में
चमकीले से सपनें है,
जो झिलमिलाते है
उड़ते है
नापनें आकाश को,
पर आँख खुली तो
सब धुआँ धुआँ,
ना सपनें है
ना अपनें है,
ना पथ है
ना राही है,
ना कारवां है
ना मंजिल है,
बस है तो एक विश्वास
सपनों और उम्मीदों को,
जीनें का
एक जज्बा
एक जुनूंन !

★ वन्दना ★

         

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