नदी: जो लापता हो गई

नदी: जो लापता हो गई

सुनो सुनो सुनो, लापता हो गई है
गाॅव से होकर षहर की ओर बहने वाली इकलौती नदी,
जिसने दिया पीढ़ियो को जीवन
गुजारी थी जिसने मानव सेवा मे कई सदी।
अखबारो चैनलो की सुर्खियों में हड़कम्प मचा है
जिन्दा भी है या नही,
पूरा सच किसी को नही पता है।
जानकारी इस प्रकार है
नाम – लिलझी
लम्बाई – 350 कि.मी
रंग – साफ
पहचान – नियत साफ आत्मा निर्मल
मुझे अहसास हो रहा है
मर गई होगी कारखानो और प्रदूषित नालो का जहर पीकर,
किसी ने नही की परवाह, क्या करती बेचारी जी कर।
राजा-रंक, डाकू-संत
अमीर-गरीब, दोस्त-रकीब
प्यास उसने सभी की बुझाई,
पर दिन-प्रतिदिन सिमटती गई वो
कभी किसी को उसकी सुध नही आई।
अब आनन-फानन में सरकार ने भी घोषित किया है मुॅहमाॅगा इनाम
पर्वत से समुन्दर तक जारी है तलाष,
सरकारी तंत्र, एन.जी.ओ. व आवाम
खोज रहे है उसकी लाष।
पर षायद ही अब वो मिलेगी
कोई नही उसे नही ढूढ पायेगा,
समय बीत गया है मित्रों
अब नही रहा षेष कोई भागीरथ
जो पुनः उसे इस धरा पर लायेगा।
स्वरचित
-षषांक श्रीवास्तव, मैहर (म.प्र.)
मो-8109153922

         

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