नव वर्ष हमारा आया है

नव वर्ष हमारा आया है,
खुशियों भरा फब्बारा लाया है,
सभी जगह सुगंध फैलाया है
प्रकृति नव वर्ष दिखाया है।

सर्दी-गर्मी के संगम में
सुहानी बयार के उमंग में
फूल खिले हैं सभी मन में
फुर्ती दिख रहे सभी तन में।

खेतों में फैली हरियाली
छटा बिखेर रही निराली
बागानों में नव फूल खिले हैं
नव-मुस्कान लिए खड़े हैं।

नव किरण सुहानी लगती है
नव स्वर्ण-रंग लेकर बहती है
आओ मिलकर रस-पान करें
जन नवीन वर्ष का गान करें।

नहीं लग रहा कुछ भी पुराना
बयार बह रही सिर्फ सुहाना
आओ मिलकर खुशियाँ बनायें
नया जीवन संकल्प करायें।

सृजन करें जीवन नव-पथ
निकले सर्वत्र लिए नव-रथ
त्यागें हम सभी भ्रष्ट -पथ
रस-पान करें सभी सत-पथ।

सत्य-पाठ अब ज्ञान करो
तिरंगा का ही जयगान करो
नहीं भूलें भारतीय नव-वर्ष
नवल भाव भरें और नव-हर्ष।

हर्षध्वनि लेकर आया हूँ
हृदय हर्षित करने आया हूँ
देशभक्त विचार-विमर्श करो
जन-गण-मन नूतन वर्ष भरो।
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रचनाकाल -: (१७/०३/२०१७ सायंकाल)
रचनाकार -:
© रमेश कुमार सिंह ‘रुद्र’

         

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