नारी एक प्रेरणा

करूणा और प्रेम के
इन्द्रधनुषी रंगों को ,
जीवन के उतार-चढाव के
ताने-बाने में ,
चतुर बुनकर सी
धागा-दर-धागा
रिश्तों को बुनती ओरत ***
चुन-चुन कंटकों से ,
नेह के बिखरे तिनके ,
समेट नीड बनाती
बिछोना वात्सल्य
का बिछाती है ओरत******
जीवन सरिता में बहती
नोका की ,पतवार सी ,
प्रवाह-पथ की लोह-चट्टानों को
आत्मविश्वास और दृढ़ता से मोम
करती ओरत ******** .
प्रकृति की प्रतिश्रुति सी
, निस्तब्ध पतझड़ मे
बसंत की आहट
सुन ठूंठों से झांकती
हरियाली सी ओरत ………

कपिल जैन

         

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