नारी तू जननी है

नारी तू जननी है ।
काली है दुर्गा है
गमो से निकलकर
तू अपनी शक्ति को
पहचान ले।
फिर न कोई रक्तबीज
न कोई महिषासुर बचे ।
उठ जाग अब तू
कलम को हथियार
बनाना सीख ले ।
कर प्रहार लेखनी से
दुश्मन की जीत को
हार बनाना सीख ले ।
ना कोई रावण
ना कोई दुश्शासन
तेरा अब अपमान करें।
कलयुग मे कोई कृष्ण नहीं है
अपनी रक्षा तू स्वयं करें।
नारी तू जननी है..
क्षीणता को छोड़
तू अपने प्राबल्य को
पहचान ले |
फिर न कोई जंजीर
न कोई पिंजरा
तुझको कैद करे |
परतंत्रता की बेड़ियो से
तू स्वयं को आजाद करे |
तू चाहे तो अम्बर को भी
धरती पर ला सकती है ।
चीर के बादल का सीना चांद
पर जा सकती है।
हौसला अपना कर बुलंद
अब आगे बढ़ना सीख ले।
नारी तू जननी है
काली है दुर्गा है
उठ जाग अब
कलम को हथियार
बनाना सीख ले।

श्वेता कुमारी

         

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