“नारी”

नारी–नर से तो है बनी
नारी–बनाती पर नर को भी
नारी–ममता से भरी
नारी–पक्षपात ममता में न करी
नारी–सदा रही पाक पवित्र ही
नारी–रिश्ते हर में भी खरी
नारी–बहती अश्रुधार कभी
नारी–खिलती बसंत फिर भी
नारी–सिर्फ दुलार प्यार की मारी
नारी–पुरुष के अहम् पर स्वयं को वाऱी
नारी–बिटिया,भगिनी,जननी बनी
नारी–जीवन जंग खूबसूरती से लड़ी
नारी–दुखों से कभी न हारी
नारी–सृष्टि की कृति सबसे प्यारी
नारी–अत्याचारियों को बखूबी सम्हाली
नारी–ईश्वर की भी दुलारी
नारी–इससे जन्नत धरा हमारी

शुचि(भवि)———-

         

Share: