पर आजाद हूँ

गुलाम नही हूँ मै
स्वतंत्र हूँ
भले ही जंजीरे
मजबूत हो,
चाहे ,मोटे ताले
हो ,जुबान पर,
मन तो आजाद मेरा
विचरता यहाँ ,वहाँ
तोड़ कर सारे
बंधन
तुम्हारे रिवाजो के ,
खुश हो तुम
भले ही बांध
कर मुझे ,,
पर आजाद हूँ
इन हवाओ
की तरह,,
फूलो में आती
सुगंध की
तरह,
तुम जियो
इसी भरम में
मैने बांध लिया ,,
पर आजाद हूँ
और रहूंगी,
बस जाहिर करने में
कुछ वक्त
लगेगा ,जंग
लग चूका
सांकलो में अब ,,
थोडा सा साहस
तोड़ देगा
बन्धन भी
तुम्हारा भरम भी

◆पूनम◆

         

Share: