पिता

पिता संघर्ष की आंधियों में हौसलों की मजार है।
परेशानियों से लड़ने वाली दो धारी तलवार है।
पिता ज़मीर है पिता जागीर है।
जिसके पास पिता है वह सबसे अमीर है।
कहने को सब ऊपर वाला देता है यशवंत।
पर खुदा का ही एक रूप पिता का शरीर है।।1।।

पिता जिम्मेदारियों से लदी गाड़ी का सारथी है।
बच्चों की हर मुसीबतो को हरने वाला महारथी है।
बच्चे के सारे सपनो को पूरा करने के लिए।
पिता अपने सपनो की भूमि को बंजर बना दी है।
सारा जीवन दुखों और परेशानियों में बिता दी हैं।।2।।

पिता सपनों को पूरा करने में लगने वाली जान है।
इसी से तो माँ और बच्चों की पहचान है।
पिता धरती पर रब और बच्चे का जहान है।
पिता एक उम्मीद है, एक आस है।पिता महान है।
परिवार की हिम्मत ,विश्वास और शान है।।3।।

बचपन में खुश करने वाला खिलौना है।
नींद आये तो पेट पर सुलाने वाला बिछौना है।
आँखों में आँसु न झलकने देता है।
खुद के दर्द पर अकेला रोता है।
पर परिवार का वही एक मर्ज होता है।।4।।

         

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