पुरानी किताब

बैठे बैठे कुछ ख्याल आया ,
चलो कुछ काम करे ,
दिल में सवाल आया ,
हम समय क्यों बर्बाद करें।

एकाएक अलमारी याद आई,
खोल कर देखा,
किताबों पर धूल मुस्करा रही थी,
मुझे लगा किताबों में कुछ बात हुई,

ज्यो ज्यो धूल साफ़ करता गया ,
किताबों का चेहरा निखरता गया,
किताबों में ज्ञान भरा अपार ,
नही करता इन्हे कोई प्यार ,

वो किताबें मेरी नजर चढ़ गईं,
ऐसा लगा कुछ मुझसे कह गईं ,
सागर सा ज्ञान भरा किताबों में ,
जरा सा घमण्ड नही किताबों में,

कुछ समय इनके साथ रह कर देखो,
सोचो ,समझो , पढ़ कर देखो ,
ये चुप चाप है , खामोश है ,
फिर भी बहुत कुछ कहती हैं,

“नीरज सिंह “

         

Share: