पेट्रोमैक्स आैर बाराती

— पेट्रोमैक्स आैर बाराती– 
                                   प्रभांशु कुमार* 

लतपथ गहनों आैर चमकीले वस्त्रों से

 लदे फदें बारातियों को आैर राह को जगमगाने के लिए 

पेट्रोमैक्स सिर पर रखे उजास भरते 

अपने आसपास वे गरीब बच्चे 

खुद मन में समेटे है एक गहरा अन्धेरा उदास 

थिरक रहे वे बाराती कीमती सूट बूट पहने 

बाजों की धुन पर आैर

 ये नंगे पैर में चुभते कंकर उछलते कूदते

 ठण्ड से थरथराते देह से मानो 

दे रहे साथ उनका सब मगन अपनी दुनिया अपनी खुशियों में

 बस इन्हें ही अहसास 

थकते रूकते पैरों आैर 

लाइट थामे हाथों के जख्म का

 पटाखों के धुएँ आैर धूल के गुबार में 

कही गुम होते जाते धुआँ धुआँ होते देखा 

अपने सपनो को||

 

         

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