बात

बातों में बात किसी की बन जाती है
बातों में बात किसी की चल जाती है

बात ही किस्से ,कहानी बन जाती है
बात ही कविता ,शायरी कह जाती है

बातों से किस्मत बनती ,बिगड़ जाती है
बात ही है जो बात पे भारी पड़ जाती है

बात ही है जो जाम भी छलकाती है
बात ही म्यान से तलवारें निकलाती है

बात मुकद्दर को संवार भी जाती है
बात अर्श से फ़र्श पे गिरा भी जाती है

ना करना कभी तुम बेसिर पैर की बातें
बात जो निकले तो दूर तलक ही जाती है

©★वन्दना★

         

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