माँ की अभिलाषा

:- माँ की अभिलाषा :-

चाँद का उज्जवल मुखड़ा है तू ,
मेरे जिगर का सुन्दर टुकड़ा है तू l
तू है तो ये दीवाली और ये ईद है ,
तुमसे ही तो मेरी हर उम्मीद है l
तू है मेरे साथ तो मेरी हर जीत है ,
तुमसे ही ये मधुर तान ये संगीत है l
आजा मैं तुझे चलना सीखा दू ,
चल तुझे ये दुनिया दिखा दू l
मै तुम्हारे हर काम आ जाऊं ,
तेरे मंजिल की मै सीढ़ी बन जाऊं l
पांव मेरे पीठ पर रख कुछ कर ले ,
धरा से अंबर तक तू उड़ान भर ले l
मां हूँ तू मेरी चाहतो का अम्बार है ,
मै जननी हूँ तेरी तू मेरा संसार है l
पाने या खोने का मुझे गम नहीं ,
तू किसी कोहिनूर से कम नहीं l
तुझे पाने के लिए दर दर भटकी ,
हर देवो के दर पर माथा पटकी l
अब भी देवो के दर दर फिरती हूँ ,
अगणित बाधाओं से मै घिरती हूँ l
भूखे पेट मै उसकी पूजा करती हूँ ,
तू छुए चाँद तारो को दुआ करती हूँ l
कैसे तेरा तुझको मुकाम दिलाऊँ,
तू बता मै तुम्हारे किस काम आऊँ l
………………BP……………………

         

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