#मी टू, #ही फ़ॉर सी से कुछ बदलेगा नहीं

कहीं पिघलना तो कहीं गलना है बहुत
वो अदना औरत है उसे सँभलना है बहुत

कहीं सीता तो कहीं पद्मावती अब भी हैं बहुत
रिवाज़ की आग पर अभी उन्हें जलना है बहुत

#मी टू, #ही फ़ॉर सी से कुछ बदलेगा नहीं
आखिरकार ज़ुबाँ उन्हें ही सिलना है बहुत

आखिर लड़के हैं ऐसी गलतियाँ हो जाती हैं
हर निर्भया को ऐसा आश्वाशन मिलना है बहुत

जो सत्त्ता में बैठी हैं इनकी सब सखी सहेलियाँ
अपनी ही जात के लिए झूठ उगलना है बहुत

पुरुष प्रधान समाज की पैदाइश है ये दोगलापन
पर औरतों,तुमको ये इनका ज़हर निगलना है बहुत

सलिल सरोज

         

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