रोटियां !

कहीं व्यर्थ फैंक दी जाती हैं रोटियां
कहीं तरसते हैं लोग पाने को रोटियां
पेट की आग के आगे है बेबस मानव
छीना झपटी में हाथ आती हैं बोटियां
आंसू छलक जाते हैं ये दृश्य देखकर
इक ग्रास की खातिर तड़पाती हैं रोटियां !
कामनी गुप्ता ***
जम्मू !

         

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