शराबबंदी

घर बन गया मन मंदिर बन गया
शराबबंदी से मेरा संसार बस गया।

आता था पिके मारता था हमें
दुनिया के भीड़ से डराता था हमें
मदिरा एक सामाजिक कलंक बन गया
शराबबंदी से मेरा…………………

मदिरा से हमारे संस्कार चले जाते है
विवेक और ज्ञान सदभाव चले जाते है
मदिरा से आदमी शैतान बन गया
शराबबंदी से मेरा…………………..

मदिरा से मन विचलित हो जाता है
लीवर,मस्तिस्क शिथिल पड़ जाता है
घर मेरा वीमारियो का अड्डा बन गया
शराबबंदी से मेरा………………………

मदिरा से घर तंगी हो जाता है
घर में क्लेश,बाधा पहुँच जाता है
पत्नी और बच्चा भूखा रह गया
शराबबंदी से मेरा……………….

मदिरा सही गलत का पहचान भुला देता है
शराब के नशे में अपराध बढ़ा देता है
मदिरापान सभी व्यसनों का जड़ बन गया
शराबबंदी से मेरा संसार बस गया।

रचनाकार -रंजन कुमार प्रसाद ,(माध्यमिक शिक्षक)
ग्राम-सकरी,पोस्ट-कुदरा,
जिला- कैमूर,(भभुआ)

         

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