समय

सर्वसत्तावान 

भाग्य बाँचता हुआ 

परम शक्तिवान 

निरंतर गतिशील 

अविरल प्रवाहमान

 समय … 

ईश्वर का पर्यायवाची 

अदृश्य किन्तु अनुभूत 

शुष्क होकर भी अवगाहनीय

 जीवन सरिता में बहती 

आयु-नौका का निरंकुश मल्लाह

 हर युग का मूक साक्षी 

सशक्त निर्णायक

 युग प्रमाणित करता 

वैध एवं अमिट 

एकमात्र हस्ताक्षर

 निर्दयतम परीक्षक 

जो परीक्षा ले तो

 हर सम्बन्ध को

 छलनी से छान देता है 

और निखार देता है

 क्षमता परख की 

महा कृपालू मित्र

यदि अनुकूल हो जाए

क्षमताओं को फलीभूत कर 

नूतन राह दिखा दे 

दुर्भाग्य को पंगु कर 

सौभाग्य बरसा दे I © तनूजा उप्रेती,

         

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