सुख दुख की पहेली

—-सुख दुख की पहेली—

रूप अनेक हैं जिंदगी के,
कोई इसे पहचाने कैसे?
कभी आस है ये जिंदगी,
कभी प्यास है ये जिंदगी।
प्यार का सागर है ये….
कभी गम का दरिया जिंदगी।
वक्त लगता है स्वप्न को……..
हकीकतें बनाने में
हौंसला भी चाहिये ,
ऊँचाईयों को पाने में
जिंदगी का सफर भी निराला है……
कभी हौंसला है जिंदगी,
कभी ठोकरों से पाला है
कहते हैं जिसे जिंदगी,
अजीब सी पहेली है।
जिंदगी का दस्तूर क्या….,.
बस सुख-दुख की पहेली है।
—–राजश्री—–

         

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