इकरारनामा

…..✍️
हथेलियों को अपनी
खाली रखना
कुछ नमी सी महसूस हो
तो उसे मेरा स्पर्श समझना

यादों की चिनाब मेरी
आँखों से हो कर बहेगी
कहते हैं
अश्क़ ही इश्क का
नायाब मोती है
पोर पोर बिखरने लगे
ओस… वो मेरा ही रूप होगा

सागर सारी उम्र मेरे मन में
मचलता रहेगा
दिल पर रख कर हाथ तुम
लहरों की सदाएं सुनाना

क्या खूब बात हो
जो लकीरें तेरी पतवार बनें
और इक रोज
मेरी जिस्त की नाव
तेरे बाजुओं के टापू पर आकर
ठहर जाए ….!!

#मुझे_हक_है_तुझे_अपनाने_का ♥️

💫दीप💫

         

Share: