ख्वाहिश

बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी।…
तुझे पाने की राह मिल जाये।
तेरे दिल मे मुझे,पनाह मिल जाये।।
मिल जाये मुझे सब कुछ,ऐ दोस्त तू सुन ले।
अगर मुझे तेरा प्यार,बेपनाह मिल जाये।।
कुर्बान हो जाऊ मै,
एक छोटी सी खुशी के लिये तेरी।
बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी।।
हर मुस्कान हर खुशी,पहचान बन जाये तेरी।
बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी

*तू मिल जाये मुझे ऐसे,समन्दर से नदी जैसे।
खो जाये तूभी मेरे,प्यार मे कुछ इस तरह।
पानी हो जाता है, दूध मे दूध जैसे।।
मचल जाये तूभी,मुझसे मिलने को कुछ इस तरह।
तड़प जाती है सागर की लहरें,किनारे से मिलने को जिस तरह।।
तू बने मेरी मोती, और शीप बनू मै तेरी।।
बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी।।
बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी

*तमन्ना है तुझको पाने की,तुझे दिल मे बसाने की।
हर-एक लम्हा हर-एक पल,तेरे ही संग बिताने की।।
भरना चाहता हूॅ तुमको,बाहो मे ऐ सनम।
अब डर नही है मुझे,इस जालिम जमाने की।।
तेरे साथ गुजरे जिन्दगी की हर घड़ी मेरी।
बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी।।
बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी।।

*तूभी तड़प उठे मुझसे,मिलने को इस तरह।
मचल जाती है सागर की लहरे,किनारे से मिलने को जिस तरह।
आकर मुझसे लिपट जा,तू भी ऐ सनम।
सिमट जाता है तूफा,पहाड़ो से जिस तरह।।
तू बने मेरी जाॅन,और जिन्दगी बनू मै तेरी।
बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी।।
बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी।

*दूर कर दे दाहिया तुझसे,गमो का हर एक साया।
तभी आज “कागज दिल”पर,लिख कर बताया।।
तू जान ले ऐ सनम,जो तुझसे खुशियाॅ दूर करे।
लड़ जाॅऊ मै उस जमाने से’ऐ मेरी जाॅन’,
जो भी तुझे रोने मे मजबूर करे।।
भले ही मेरे हर एक आॅशू,मुस्कान बन जाये तेरी।
बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी।।
बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी।।

*मुझे तेरा नाम मिल जाये,तेरे हाथो से एक जाॅम मिल जाये।
तू गुजारें एक लम्हा मेरे साथ ऐ दोस्त,
काश कोई ऐसी शाम मिल जाये।।
डर कैसा इस जमाने से,तू आजा किसी बहाने से।
वरना मै कभी न लौटूगा,मधुशाला और मैखाने से।।
सजा कर रख लू,दिल की मंदिर मे मूरत तेरी।
बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी।।
बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी।
तुझको पाने की राह मिल जाये।,,
तेरे दिल मे पनाह मिल जाये।

         

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