चेहरा खिला खिला सा है

क्या बात हुई है बतला दो , जो इतनी दूर हो हमसे तुम ।
आँखों में नमी सी लगती है , और चेहरा खिला खिला सा है ॥

दिल मे दर्द समंदर सा , होठो पे हो मुस्कान लिए ।
तुम भूल गई बो सब लम्हे , जो हमने तुमने साथ जिए ॥
क्या गलतफहमियाँ जन्मी है , या हमसे कोई गिला सा है ।
आँखो मे नमी सी लगती है , और चेहरा खिला खिला सा है ॥

मत रोको आज लबों को तुम , सब इनको कह जाने दो ।
क्यों अश्क छिपाए आँखो में , अब इनको बह जाने दो ॥
कभी है चलता कभी है रूकता , ये दर्दो का सिलसिला सा है ।
आँखो में नमी सी लगती है , और चेहरा खिला खिला सा है ॥

मै हूँ तेरे दिल में और तुम , मेरे दिल मे रहती हो ।
जुबाँ की तुम्हे जरूरत क्या , सब नैनो से जो कहती हो ॥
हमसे खफा खफा सी हो , या कोई नया मिला सा है ।
आँखो मे नमी सी लगती है , और चेहरा खिला खिला सा है ॥

एक पल जो हमसे दूर हुई , लगा दुनियाँ ही झूठी है ।
तेरी ये मुस्कान प्रिये , मेरे हर दर्द की बूटी है ॥
”साहिल” मैं तू लहरों सी , लगा सब कुछ मिला मिला सा है ।
आँखो मे नमी सी लगती है , और चेहरा खिला खिला सा है ॥

रचनाकार
गजेन्द्र मेहरा ”साहिल”

         

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