एक ऐहसास तुम्हारे होने का

सुनो
आज दिल बड़ा बेचैन है
मुनासिब समझो तो इतना बता दो
कही तुम कुछ उदास तो नही
एक ऐहसास है तुम्हारे होने का
कही तुम मेरे आस पास तो नही

एक यक़ीन सा है
तुम्हारे यक़ीन पर
कही तुम वो विश्वास तो नही
एक कशिश सी है तुम्हे पाने की
मुनासिब समझो तो इतना बता दो
कही तुम मेरी वही तलाश तो नही

         

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