नशीली नजर

नजर की बाण ही ऐसी,
नशीली आॅख से निकले।
जो दूजें कें नजर में जाकें,
दिल कों छल्ली कर बैठें।।
*
उसें तड़पायें मिलनें कों,
करें मंजबूर रोजाना।
तों दिल घबरा कें तेजी से,
उसें बीमार कर बैठें।।
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बिना देखे ना दिल को चैंन हों,
ना हों शुकूॅ दिल में।
धड़कता हैं यें जोरों सें,
कुछ ऐसा काॅम कर बैठें।।
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……… नजर की बाण ही ऐसी,
नशीली आॅख से निकले।
जो दूजें कें नजर में जाकें,
दिल कों छल्ली कर बैठें।।……..
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यें रातों की चुरायें नींद,
छिनें भूक लोगों सें।
शकल हों जायें पागल सी।
कुछ ऐसा हाल कर बैठें।।
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हैं उठता दर्द सीनें में,
तों दिल को थाॅम ना पायें।
बतायें क्या तुम्हें कैसें,
मेरा क्या हाल कर बैठें।।
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लिखा कागज कें पन्नों पर,
आरंम्भिक प्यार की गाथा।
बनाया अश्क की श्याही,
कलम दिल की उठा बैठा।।
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बस इतना बोलता कौशल
ना फसना इस भवंर में तुम।
निकल ना पाओं गे वरना,
ये दिल कहीं डूब ना बैठें।।
………..नजर की बाण ही ऐसी,
नशीली आॅख से निकले।
जो दूजें कें नजर में जाकें,
दिल कों छल्ली कर बैठें।।……….2

         

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