“बारिश”…

°°°
इस बार की बारिश…
कुछ ख़ास है…
क्योंकि
कुछ कुछ अनमोल लम्हें…
अपने पास है…!!

पहले की बारिश…
विरह को बढ़ाने में तत्पर…!
मगर…आज
बारिश की बूँदें न बेअसर…!!

रिमझिम बारिश की बूँदें…
उसके छुअन की…
स्पर्श करा जाती…!
इक मीठा अहसास…
कुछ स्मृति-पन्ने पर…
बिना रोक-टोक के…
दर्ज करा जाती…!!

भले वो पास नहीं…
मगर
ये सरसराती हवाएँ…
मानो कोई संदेश लाये हैं…!
मेरी गली आकर…
मेरे हमसफ़र के होने का…
ख़ूबसूरत अहसास कराये हैं…!!

ये पल ये रोमाँच…
ज़िंदगी की अद्भुत देन है…!
कुछ तुम भी याद कर लो…
“कृष्णा” के अज़ीज़…
क्या ख़ूब…
बारिश / वर्षा / रेन है…!!

— °•K. S. PATEL•°
( 01/09/2018 )

         

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