बून्द भर छुअन

बारिश की
पहली बूँद
जब धरती को छुती है
तब उस बून्द के स्पर्श से
महक उठती है प्यासी धरा
जब अम्बर और धरा एक होते है
बारिश की बूंदों के जरिये
एक दूजे के चुम्बकीय एहसास में खोते हैँ
हां महसूस करना कभी
देखना… हां देखना गौर से कभी….
तृप्ति की
सोंधी सी महक
सीधे रूह में उतर आती है ….!!

बस ऐसे ही तुम्हारी इक बून्द भर छुअन
‘सोनी’ की अतृप्त देह को तृप्त कर जाती है
और
एक अकल्पनीय एहसास से मुझे महका जाती है!!
©®soni

         

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