बेरूखी

मत मोड़ मुझसें मुह अपना,
अभी तो मिलना बाॅकी हैं।
क्यों करती हों बेरूखी मुझसें,
अभी जानना बाॅकी है।।
अभी प्यार कें सभी मायनें,
जान नहीं पायें हैं हम।
अभी जागना,अभी तड़पना,
अभी सताना बाॅकी हैं।।
अभी तो”कागज”पर लिख कर,
“दिल”की बातें बतलाना हैं।
खत लिखना,उसकों पहुचाना
“कागज दिल”करना बाॅकी।।
थोड़ी सी बात करने के बाद,
तुम बातें करना भूल यें।
अभी बहुत सीं बात पड़ी हैं
उन्हें बताना बाॅकी हैं।
अभी राह पर रूक-रूक कर
हमको भी तुमकों तकना हैं ।
अभी नुक्कड़ में बैठ-बैठ कर,
बाट देखना बाॅकी हैं।।
मत मोड़ मुझसें मुह अपना,
अभी तो मिलना बाॅकी हैं।
क्यों करती हों बेरूखी मुझसें,
अभी जानना बाॅकी है।।

         

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