बॉंवरी बांसुरी

कृष्णा
आज बॉंवरी हो जाऊँ,अपने कृष्णा में खो जाऊ
अपने’ दिल को कागज़ ‘के, हर लम्हा उस पे श्याम लिखू,
मैं हूँ बांसुरी मधुर बोलो तो ,सुमधुर तान छेड़ आऊँ
मैं ही तो हूँ जो राधा को, कृष्णा के पास खींच लाऊँ ,
गर्विता अधर पे कृष्णा के, विश्राम मेरा चिर निद्रा तक
कोटि पुण्य का ये प्रताप ,श्याम अधर पे मोक्ष पाऊं ,
मैं कृष्ण प्रिय,मैं कृष्ण सखी ,मुझ बिन तुम कृष्ण, कहाँ पाओ
मैं कृष्णा के अधरों पर उनके हाथो में पाँव धरुं
फिर सुमधुर तान छेड़े कृष्णा ,मैं उन तानो में नृत्य करूँ।

शिखानारी

         

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