मुलाकात

करके अनुपम श्रृंगार,
भर के आंखों में प्यारl
मिलने को मुझसे आई थी,
परियों की रानी इक बारll

शरमाते हुए सामने से आकर,
अपनी पलकों को झुकाकरl
थमा गई हाथ में मेरे,
एक प्यारा-सा गुलाबl
मिलने को मुझसे आई थी,
परियों की रानी इक बारll

मुस्कुराते हुए कुछ कह रही,
मुझसे थी वह बार-बारl
कुछ भी समझ ना पा रहा था मैं,
हाल था हुआ मेरा बेहालl
मिलने को मुझसे आई थी,
परियों की रानी इक बारll
देख के उसकी कंचन काया,
अपनी तो सुध-बुध पर थी मायाl
फिर दिल ने मेरे मुझ पर हुकुम चलाया,
कर ले तू भी प्यार भरा इजहारl
मिलने को मुझसे आई थी,
परियों की रानी एक बारll

         

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