मुहब्बत…

तुम्हारी मुहब्बत में…… एक किताब सी हो गई हूं मैं हर कोई देख चेहरा मेरा पढ़ लेता है हाले-दिल व्या….. बदले -बदले से अंदाज मेरे बेवजह हंसती मुस्कुराती हूं खोई-खोई सी रहती हरवक्त खबर भी नहीं कोई और भी है जमाने में….. तुम्हारी मुहब्बत में…… एक किताब सी हो गई हूं मैं मुहब्बत में जुवां खामोश अहसास बोलती है…. दिल के राज आँखें खोलती है कुछ कहो न कहो तुम किसी से महक प्यार की….. सबको लग जाती है बड़ी मुश्किल है चाहत में कुछ भी छुपाना….. उत्तेजनाएं दिल की बेकाबू होती है जितना दबाना चाहो इसे उतना ही मचलती है दिल की कागज पर लिखा है नाम तेरा तुम्हारी मुहब्बत में….. एक किताब सी हो गई हूं मैं….

         

Share: