“सागर से गहरा…”

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*सागर* से गहरा है…
प्यार मेरा…!
तुम…
एक बार उतरकर तो देखो…
डूब न जाओ तो कहना…?
जान जाओगे मुझे…
शुरू से आखिर तक…
बस… संग-संग मेरे बहना…!
कुछ तरंगें…
मन में उठेगी ज़रूर…
ज़रा देर तलक…
बस… चुपचाप ही रहना…!
मैं ये नहीं कहता कि…
तूफ़ान आयेगा नहीं…
अनचाहे पल गुजरने तक…
बस… ज़रा-सा सहना…!
सच…
*सागर* से गहरा है…
प्यार मेरा…
न उतर पाओ मुझमें..
तो एक गुजारिश है…
मेरे किनारों में ही बसना…
मेरे किनारों में ही बसना…!
*सागर* से गहरा है…
प्यार मेरा…!!

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— °•K.S. PATEL•°
( 24/03/2019 )

         

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