सुन बादे सबा

सुन ऐ बादे सबा !
जरा धीरे से गुजरना
वहाँ से
जहाँ प्रीत की
खुशबू बिखरी हो
जहाँ नफ़रतों से
मुहब्बत का रंग
गहरा हो
समेट लेना
उसे अपने दामन में
फिर मेरी गली आना…
यहाँ फिज़ाएँ
उदास सी हैं
सारे रंग बेमानी से हैं
बड़ी घुटन सी है
मैं तुम्हारी ताज़गी सहेज
जीवन में
कुछ नए रंग भर लूँगी

         

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