अकेलेपन की जिन्दगी

एक कसक
एक खलिश
कुछ मिला अनमिला
कुछ गुमा अध गुमा
कुछ अधूरे ख़्वाब
कुछ नामुकम्मल ख्वाहिशें
सबकी टूटन
और नए रास्तों पर
चलने की हिम्मत
कितना कुछ बाँट बूंट कर
इन कविताओं से
हल्का कर देता है
जीने का हौंसला
भी दे जाती है
शुष्कता से शून्यता
की ओर अलविदा ना
होकर
एहसासों की
अभिव्यक्ति बन जाती है
ये अकेलेपन की जिन्दगी….

कपिल जैन

         

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