कच्चे धागे

यूँ जब भी मुस्कुराते हो,
मेरे अश्कों पर तुम।
तो मेरा कागज दिल,
न जाने कितने टुकडों में बिखर जाता है।
उसके हर टुकड़े पर अब
भी तेरा चेहरा ही मुस्कुराता है।।
मेरी ख़ता बस इतनी सी,
की तुझमें ही ख़ुदा देखा मैंने,
कच्चे धागे सा रिश्ता, निभा कर सोचा मैंने
क्यों अपने कागज़ दिल पर,
तुम्हारे प्रेम के गीत लिखे मैंने।
न भूली हूँ न भूल पाऊंगी,
कभी तुम्हे भी बहुत याद आऊँगी।
कच्चे धागे की डोर जो थी कमज़ोर,
सोच के फिर आँखों मे अश्क़ भर लाऊँगी ।।

         

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