कठपुतली

💐💐💐💐💐💐💐
” कठपुतली ”

न कोई जज़्बात है
न कोई अरमान है
मेरी जिंदगी की डोर
किसी और के हाथ है

स्वतंत होकर निकलूँ मैं
जब भी बरसात हो
ऐसी मनोकामना
मेरे ह्रदय में रहती है

कठपुतली हूँ मैं
औरो के इशारे पर चलती हूँ
मेरे मन की पीड़ा अपार
अपनों के लिए बंधी रहती हूँ

सोने का गास न खाऊ
न अमृत की चाह रखू
हर बन्धन से मुक्त हो
स्वछन्द गगन में उड़ना चाहूँ

क्या मन की वेदना व्यर्थ है
मेरा कर्म निहित है
मेरी अपनी कोई सोच नही
मेरा सब पराधीन है ।

” नीरज सिंह “

         

Share: