अल्फाज कागज पे

लिखा जो दिखा,तो शब्द् बन उतर आए ,
ख़ामोश अल्फाज कागज पे।
मन के आसमा पे,छाये जो बादल,
बो बूंद बन भिगो गई,
शब्दो को कागज पे।
सूक्ष्म अनुभूतिया, अचरज भरी निग़ाहें थी,
जब लिख डाले मेने, भाव अपने कागज पे।
आसमान को निहारती,सूनी पलके, नींद से खाली,
शब्दों का एक चित्र बनाया,
जब ,जज़्बातों का कागज पे।
कुण्डली मार कर बैठी थी गम,
मेरी खुशियों के दामन पे,
सारा बिष खीच डाला,
कलम लिख कर कागज पे।
निरुदिशा सी चली जाती मै,
मंज़िल की तलाश में,
एक पता लिख डाला मेने,
सुन्दर -कोरे कागज पे।।
***साथी मुख़र्जी ( टीना )***

         

Share: