“खोया प्यार …बस दिला दो”…

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माँ का दूध पिया…
मगर कर्ज चुकाना है बाकी ,
बूढ़ी माँ है वृद्धाश्रम में…
फिर सारी खुशियाँ हैं कहाँ की ?
पिता की उम्र झलकती है…
पके-झड़ते हुए बालों में ,
फिर घर से अलग होकर…
डूबे क्यों अतीत के ख़्यालों में ?
बहन-भाइयों की वो…
ख़ूबसूरत-सी मटर-गश्ती ,
उफ्फ… कोई बीच राह में मानो…
रोक दिया हो ये क़श्ती ।
ख़ूबसूरत… न जाने कितने रिश्ते-नाते…
मानो खो गया है जीवन में ,
परिवार बहुत रह गया है छोटा…
घर…बस… रह गया है मन में ।
क़ाश… फिर से कोई वक़्त पलटा दे…
तो जीवन बन जाये मधुबन ,
अभी जी तो रहें हैं सब…
मगर अश्रु छुपा न पा रहे नयन ?
हे ईश्वर… सद्बुद्धि दो…
खोया प्यार…बस दिला दो ,
बुरी सोच पनपाओ नहीं…
अच्छी अभिलाषा…बस खिला दो ।
बहुत हो चुका अब दुनियादारी…
सबका हृदय अब फिर से मिला दो ।
बहुत हो चुका अब दुनियादारी…
सबका हृदय अब फिर से मिला दो ।
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