दाह संस्कार

दाह सँस्कार
आज मरे कल दूसरा दिन
!! सारी सारी रात जाग कर जिसने सबकी
मंशा पूरी की थी
👌
रात अपना ” दाह संस्कार ” देखा
मेरा शव एक चबूतरे
पर रख कर आसपास
अगरबत्तियां जलाकर
पिंड दान
करके मुझे खुद से अलग कर लिया
मेरे अपनो ने
और मैं प्रेतयोनि
में चला गया हूँ ऐसा मान कर
करीबी लोग मेरी शान्ति के वास्ते
प्रार्थना करने लगे और मेरे
अपने ही मुझे कुछ
नम आंखों से जड़ हो चुके
मेरे किराए के मकान को
चिता पर लिटाते वक़्त रोने लगे
और कुछ जो साथ जनाजे के गए थे
अपनी बातों
में मशगूल हो लिए
और कुछ मन में मुस्कुरा भी रहे थे
जैसे कह रहे हों
” बहुत बनता था सयाना ”
!!
प्रेतयोनि में चली गयी रूह की
शांति पर अब हज़ारो रुपये ये लोग
दान देंगे
और नाम छपवाएँगे
और फिर अपनी पीठ थपथपाते हुए
ये करीबी लोग फिर रम जाएंगे
अपनी अपनी दिनचर्या में
मेरा दाह सँस्कार गुम हो
जाएगा किस्सों में .!!
👌
मनु

         

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