ना मै बदला ना मैखाना।

ना मै बदला ना मैखाना।
ना मै बदला ना मैखाना।
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बदल गयें हैं लोंग यहाॅ और,
बदल गया हैं जमाना।
बदल गई नजरें लोगों की,
बदल गयें अफसाना।।
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बदल गयें वों लोग यहाॅ जो,
साथ बैठ कर पीतें थें।
बदल गयें वों लोग आज जो,
एक साथ ही जीतें थें।।
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दुनिया बदली रिस्तें बदलें,
और कइयों कें रस्तें बदलें।
लोगों कें लहरें बदलें तों,
कइयों के चहरें बदलें।।

कइयों कें प्रेंमी बदलें,
और बदल गया हर नजराना।
पर बदला ना मेरा जाना,
वों गलिया और वों मैखाना।
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कुर्शी बदली सत्ता बदलें,
कइयों कें शहरें बदले।
गढ्ढे, सड़कों के गहरें बदलें तो,
नदियाॅ नहरों में बदलें।।
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बदल गया वो घर गाॅव का,
कच्चे छानी दार जो थें।
बदल गई परिवार की रौनक,
एक ही छत में चार जो थें।।
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बदल गयें रिश्तें दुशमन में
पहलें कभी परिवार जो थें।
बदल गयें दिल के अफसानें,
कागज पर जों लिखतें थें।।

बदल गया अब,प्यार का भी ढग,
बदली चहत जतलाना।
पर बदला ना मेंरा जाना,
वो गलियाॅ और वों मैखाना।।

         

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