फलसफा जिंदगी का

सुनो
अब उम्र हो गयी है मेरी जाने की
वर्धवस्था जवाब देने लगी है अब
बहुत दुनियादारी निभा ली
अब क्षणभर में टिकट कट जाएगी
अब और बोझ सहने लायक यह तन मन नही रहा
मैं न रहूं तो अपना ख्याल रखना
मेरे बाद जिंदगी से न कोई मलाल रखना

इतना ही सुना था मैंने की एक आह भरी और चल दी वो मुझे छोड़ कर
आह भरी आखरी उसने और मुझे भान न हुआ उसकी आखरी कराहट का

याद आता है बार बार उसका मुझे कहना कोई मलाल न रखना
कैसे न रखूं
उसकी रुखस्तगी से पहले का दर्द,और अंदर की चीखों को क्यो न जान पाई मैं

अब यह हाल है इक कोने में बैठी हु शांत निढाल सी
समझना चाह रही हु उसके दर्द को
सुनना चाह रही हूं उसकी लगाई आखरी आवाज को

वो तो चली गयी
बेचैन मुझे कर गयी
मौन शोक मना रही हूं मैं
और ताह उम्र मनाती रहूंगी

जिंदगी का फलसफा अब तक न समझ पाई थी
इक नई उलझन में उलझ के मैं रह गयी
मौत जाते जाते न जाने कितने सवाल मुझसे कह गयी

©® Soni…

         

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