मैं किसान हूँ

इक नाम और गरीब मेरा, मैं किसान हूँ|
सबसे बुरा नसीब मेरा , मैं किसान हूँ|
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भूखा हूँ पर अनाज के गोदाम भर दिये,
किस्सा बड़ा अजीब मेरा, मैं किसान हूँ|
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पैदा नहीं हुआ वही मँहगा मिले मुझे,
जादा उपज सलीब मेरा , मैं किसान हूँ|
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सींचूँ पसीने से वो खजाना तो देखिये,
रहता नहीं करीब मेरा, मैं किसान हूँ|
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वेचारा कह रहे हैं ये सारे मुझे मगर,
कोई नहीं हबीब मेरा , मैं किसान हूँ|
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ठगते मुझे यहाँ वो मसीहा जिन्हें कहा,
मौसम भी है रकीब मेरा, मैं किसान हूँ|
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महनत का फल मुझे ही न मिलता है बस मनुज,
रूठा है यूँ हसीब मेरा, मैं किसान हूँ|
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हबीब–सखा, हसीब–हिसाब करने वाला
रकीब-दुश्मन, सलीब–एक तरह की फांसी

         

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