“विरह”

ये कविता उस “विरह” मे लिखी गई है।
जब एक प्रेमी जोड़े की जुदाई शादी के बाद होती है।
तब प्रेमी अपनी प्रेमिका से बोलता है।।….

छोड़ कर साथ मेरा जो तुम चल दिये,
मुझको बतलाते जा अब मै जाॅऊ कहाॅ।
*
तू तो सज के सवर के चली जा रही,
हाॅथ मुझसे छुड़ा कर चली जा रही।
गैर को अपना कह चली जा रही।।
प्यार अपना दफन कर चली जा रही,

रह सकूॅ तेरे बिन अब मै कैसे यहाॅ
छोड़ कर साथ मेरा जो तुम चल दिये,
मुझको बतलाते जा अब मै जाॅऊ कहा।…2
*
लाश जिन्दा बना जीते जी मार कर,
लाॅखो तुकड़े किये दिल मेरा तोड़ कर।
घर बसाने चली तुम मुझे छोड़ कर,
नाता अपना चली गैरो से जोड़ कर।।

जी नही पाऊॅगा तेरे बिन मै यहाॅ।
छोड़ कर साथ मेरा जो तुम चल दिये,
मुझको बतलाते जा अब मै जाॅऊ कहाॅ।….2
*
रूक गई धड़कनें थम गई हैं हवाॅ,
दिल यही सोचत है कि जाऊ कहाॅ।
जैसे कलियो के बिन भवरा दर दर फिरे,
मेरी हालत बना दी है ऐसी यहाॅ।।

बोझ हलका हुआ”कागज दिल”मे लिख कर,
मेरी बाते सुने गा अब सारा जहाॅ।।
छोड़ कर साथ मेरा जो तुम चल दिये,
मुझको बतलाते जा अब मै जाॅऊ कहाॅ।….2

         

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