वेदना

कागज पर मेरा चैन बिकता रहा । मैं बेचैन था रात भर लिखता रहा !! छू रहे थे सब बुलंदियां आसमान की । मैं सितारों के बीच, चाँद की तरह छिपता रहा!! दरख़्त होता तो, कब का टूट गया होता । मैं था नाजुक डाली, जो सबके आगे झुकता रहा !! मैं प्यार बाँटता रहा, वो कागज़ दिल बनता रहा!!

         

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