शराबी

शराबी थे नही पहले,
शराबी कर दिया तूने।
मौहब्बत का दिलो मे रंग,
जब से भर दिया तूने।।
*
नशा आखो का पहले घोल कर,
आखो से पिलवाया।
फिर अपनी मीठी बातो का भी,
चखना हम को खिलवाया।।
*
मौहब्बत के नशे मे चूर था,
कुछ इस तरह तेरी।
ना दुनिया की कोई परवाह,
न थी खुद की फिकर मेरी।।
*
नशीले बाॅण आॅखो के,
चुभा बैठी थी जो तूने।
बिना तेरे लगे बीरान दुनिया,
महफिलें सूने।।
………शराबी थे नही पहले,
शराबी कर दिया तूने।……
……..मौहब्बत का दिलो मे रंग,
जब से भर दिया तूने।।……
*
भुला बैठा था दुनिया को,
मै खुद से होके बेगाना।
नही भाता था मुझको कुछ भी,
तेरे बिन मेरी जाना।।
*

उमर सोला के मौसम मे,
घिरे बादल जवानी के।
बिना वर्षे कहाॅ थमते,
ये बादल थे जवानी के।।
*
मौहब्बत की जो कुछ बूंदे,
मिला दी तूने फिर इस मे।
नशे की रैन सारी उम्र वर्षी,
बह गया जिस मे।।
*
“कगज दिल”मे बया करता हूॅ,
दिल से जो किया तूने।
भरी रहती थी महफिल से,
जो गलिया अब लगे सूने।।
……….शराबी थे नही पहले,
शराबी कर दिया तूने।….
………मौहब्बत का दिलो मे रंग,
जब से भर दिया तूने।।….

         

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