शिकवा

तुम लोगो से क्या अब शिकवा मै खुद से शर्मिन्दा हूँ खुद से पूँछ रहा हूँ अब मै आखिर मै क्यों ऐसा हूँ अपने अपने के चक्कर में सारे रिश्ते छूट गये सारे लोग बडे दिल वाले शायद मै ही छोटा हूँ कितने साल महीने बीते मै कितना नादान रहा लोग बुरा कहते है मुझको क्योकि मै ही सच्चा हूँ अच्छा बनने की चाहत में जाने क्या क्या कर बैठे उनको कहाँ बदलना था मै ही पल पल मरता हूँ सबका साथ दिया मैने बस मेरी ये ही गलती थी सबने हाथ छुडायें मुझसे तो क्यों उनसे लड़ता हूँ उम्मीदों की गठरी दिल पे लादे लादे फिरता हूँ सोच रहा हूँ इस दुनिया में आखिर कैसे ज़िन्दा हूँ

         

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