हम फिर मिलेंगे

हम फिर मिलेंगे,
तो क्या हुआ,जो इस जन्म
तुम हमारे न हुए।
भविष्य के गर्भ में शायद
कुछ खुशनुमा राज़ दफन हो,
जो अब तक की सारी कड़वाहट को,
शहद की चाशनी में लपेट बाकी की
ज़िन्दगी मिठास से भर दे।
अब तक जो सुना पड़ा है ये गुलशन,
हर शाख जो फूलों के बिना गुमशुम सा है।
सुनी वादियों में हज़ारो रंग के फूल खिलेंगे,
हम फिर मिलेंगे,,,,,
हमें जान से ज्यादा चाहने वाले,
किसी और की चाहत बन बैठे।
हमारे दिल मे धड़कते धड़कते,
किसी और से धड़कनो का गठबंधन कर बैठे।
कैसे कह दूं तुम्हें बेवफा?
मोहब्बत के हज़ार रंग,
एक रंग बेवफाई का भी।
इस रंग को भी तेरा उपहार समझ
सजा लिया अपने जीवन में,
क्या पता!कल इस जहां में,
मोहब्बत और बेवफाई के लिए
तेरे मेरे नाम के चर्चे होंगे,
हम फिर मिलेंगे,,,,,,
छोड़ गए हो मेरी किस्मत में स्याह रातें,
मेरे गालों पर आंखों से बहते ,
काजल की कालिमा,
सांसों में फिर भी तेरी ही महक,
दिल मे तेरे नाम से उठती तड़प,
जाने क्या कशिश है तेरे नाम मे भी,
इस नाम से धड़कनें अक्सर तेज़ हुआ करती हैं।
जाने कब मिले थे पिछली बार,
वो रूखा ,जर्द चेहरा,
थम सा गया निगाहों में।
और जाते जाते तुम मेरी मुस्कुराहट ले गए।
पर यकीं है मुझे,
तुम लौट आओगे,
मेरे इन लबों पर एक बार फिर मुस्कान चमकेंगे,
हम फिर मिलेंगे,,,,
Shobha kiran
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