हा तुम बदल गये हो

डबडबाई आंखों से तुम्हें देखा,
तुम कितने बदल गए हों …..
हां कभी कभी लगता है कि..
तुम दिखते तो हो वैसे ही…
पर क्यूं मुझे अहसास होता है
तुम, हां तुम बहुत बदल गये हो।

आंखों की भाषा पहले तुम…..
कैसे कुछ कहें बिना ही…….
समझ जाया करते थे…….
मेरे प्यार को कभी…….
संकेतों को समझने वाले तुम,
तुम, हां तुम बहुत बदल गये हो।

मैं कब तुम्हें कुछ कहती,..
मेरी आंखों की शून्यता को..
कैसे दूर से पढ़ लिया करते थे.
तेज़ क़दमों से चलते हुए तुम,
पीछे छोड़ आगे निकल गए… तुम
तुम, हां तुम बहुत बदल गये हो।।

डॉ राजमती पोखरना सुराना
भीलवाडा राजस्थान

         

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