हुदहुद की कहानी में

भीँगी तो होगी पलकें, आपकी
डूबती देख जिंदगियाॅ पानी में…..॥

उदास नजरों में दद॔ तो छाया होगा
मरते देख कईयों को जवानी में……॥

हुक उठी हीगी सीनें में ,
कलेजा चाक हुआ होगा
बहते धरों को देख ,
मौजों की रवानी में…..॥

सुनकर करूण चित्कार,
सिसकिंया व विकल क्रन्दन
कईं उदास रंग बिंखरें होंगे,
चेहरा-ए-नूरानी में….॥

क्या पहचाना है कभी,
उस शबनमी निःस्वास को
जो मुद़्दतों से कैद हैं,
अश्कों के संग पानी में…….॥

गर जमीर जगाना हो,
तो आओ कभी इस पार
जहां कई दर्द है बयाँ,
हुदहुद की कहानी में……॥

वो विभत्स मंजर डूबते बच्चे,
व्याकुल मां की ममता
सुनीं न होगीं वो चित्कार ,
देख लाश बच्चों की पानी में……….॥॥॥॥

स्वराक्षी स्वरा

         

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