कलम धार

कलम धार,,
सिक्का जोर से उछलिये, उनका चरितर देख ।
कागज दिल उकेर चले, हो रहे देख रेख ।।

हो रहे देख रेख, बहे देख साहित्य सुधा ।
उतारते उर लेख, मिटाते कभी उर छुधा ।।

दिखा अब कलम धार ,बदल जाये लेख लिखा ।
चमक दिखा इक बार ,चल जाये खोटा सिक्का ।।
नवीन कुमार तिवारी,,

         

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