ख़ुशी के लम्हे पंख लगाकर

ख़ुशी के लम्हे पंख लगाकर
देखो उड़ ही जाते हैं,
गम के लम्हे समय से पहले
दौड़ कर ही आते हैं,,
मंजिल गर होती है गुम
रस्ते भटक ही जाते हैं,,
जीवन एक मृतक बन
हम जीते ही जाते हैं,,,
लहद में हो आशियाना
ख़्वाब ये सजाते हैं,,
ख़ुशी के पंछी जाने क्यों
लौट कर नहीं आते हैं,,,

शुचि(भवि)

         

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