आधुनिकता

पुराने जमाने से है आधुनिकता भली
खिल रही है सहज यहाँ कोमल कली

मधुपान अब नही रहा व्यंग का विषय
झूम रही मादकता में आज हर गली

चल रही आज नारी की पुरुषों पर देखो
बोले मीठे बोल,घोलें मिश्री की डली।

कम कपड़े और बातें ज्यादा यही बचा
आज का नारा,फुले किशोरावस्था नवफ़ली

भूल गया नवयुग,अपनी सारी ही मर्यादा
जाने कैसे, देखो आग संस्कारों की जली।

अब नही कोई भी कमजोर यहाँ पर किसी से
बेटियां भी बेटों जैसे ही आज.. ………पली।

हो रहे बालात्कार क्यूँ,कौन भला कारण को समझे
सीखा आधुनिकता पाठ अब क्यों अपने हाथ मली।

✍संध्या चतुर्वेदी
मथुरा उप

         

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